IAS Tukaram Mundhe: 21 साल में 25 तबादले, कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे; लोग बुलाते हैं सिंघम

महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में लगभग 25 तबादलों का सामना करने के बावजूद उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। मई 2026 में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर का पदभार संभालने के बाद से वे मिलावटखोरी के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चला रहे हैं, जिसने उन्हें एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कौन हैं तुकाराम मुंढे?

तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के बीड़ जिले के एक साधारण परिवार से आते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 2005 बैच के IAS अधिकारी के रूप में महाराष्ट्र कैडर में नियुक्त हुए। उनकी छवि अक्सर हरियाणा के चर्चित अधिकारी अशोक खेमका जैसी बताई जाती है — बेदाग, सख्त और राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने वाली।

21 साल, 25 तबादले

मुंढे का प्रशासनिक करियर उनके बार-बार होने वाले तबादलों के लिए भी जाना जाता है। बताया जाता है कि 21 वर्षों की सेवा में उनका करीब 25वीं बार तबादला हुआ है — यानी औसतन हर साल एक से ज्यादा पोस्टिंग बदलाव। नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर और विभिन्न विभागों में सचिव जैसी जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने नियमों के सख्त पालन और पारदर्शिता पर जोर देना जारी रखा, भले ही इसकी वजह से उन्हें बार-बार नई पोस्टिंग मिली हो।

FDA कमिश्नर के तौर पर बड़ा अभियान

मई 2026 में तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर का पद संभाला। पदभार संभालते ही उन्होंने नकली दूध, मिलावटी पनीर-घी, गुटखा और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ राज्यभर में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। दो महीने के भीतर ही FDA की टीमों ने राज्यभर के रेस्टोरेंट, होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों में सैकड़ों छापे मारे, जिनमें दर्जनों फूड लाइसेंस रद्द किए गए।

मई 2026FDA कमिश्नर नियुक्ति
1000+छापे (दो माह में)
50+लाइसेंस रद्द
25वांकरियर का तबादला

स्कूलों में जंक फूड पर सख्ती

मुंढे के निर्देश पर FDA ने स्कूल परिसरों में चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक और चॉकलेट जैसे कम पोषण वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की मुहिम भी शुरू की। इसके साथ स्कूल कैंटीनों में पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, ताकि बच्चों की सेहत को लेकर बेहतर मानक तय हो सकें।

अपने ही विभाग में असंतोष का सामना

हर अभियान की तरह मुंढे की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे हैं। 30 जुलाई 2026 को छत्रपति संभाजीनगर स्थित राज्य अन्न एवं औषध प्रशासन प्रयोगशाला के 29 अधिकारियों-कर्मचारियों ने खाद्य एवं औषधि मंत्री नरहरि झिरवाल को एक शिकायती ज्ञापन सौंपा। इसमें दो शिफ्ट में काम के दबाव और कार्यशैली को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। यह घटनाक्रम दिखाता है कि उनकी सख्त कार्यप्रणाली को लेकर विभाग के भीतर भी अलग-अलग राय है।

ध्यान दें: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। तथ्य समय के साथ अपडेट हो सकते हैं — ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करें।

"सिंघम IAS" उपनाम क्यों?

समर्थक तुकाराम मुंढे को "सिंघम IAS" कहते हैं क्योंकि वे मिलावट, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनुशासन के मामलों में किसी तरह की ढील नहीं बरतते। उनकी कार्यशैली को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है, लेकिन उनकी बेदाग छवि और सख्त फैसलों ने उन्हें आम जनता के बीच एक अलग पहचान दी है।

निष्कर्ष

तुकाराम मुंढे का प्रशासनिक सफर भारतीय नौकरशाही में अनुशासन और जवाबदेही की मिसाल माना जाता रहा है। लगातार तबादलों के बावजूद उनके काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया। महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रहा उनका मौजूदा अभियान उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला रहा है — आगे यह अभियान कितना असरदार साबित होता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक समाचार स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी आधिकारिक निर्णय, आंकड़े या घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित सरकारी विभाग या प्रामाणिक समाचार स्रोत से अवश्य करें।

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