8वां वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों ने 12 फरवरी को हड़ताल की चेतावनी 20% अंतरिम राहत समेत कई मांगें सरकार के सामने
8वां वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों ने 12 फरवरी 2026 को हड़ताल की चेतावनी
20% अंतरिम राहत और अन्य मांगों को लेकर सरकार पर दबाव
केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के एक बड़े संगठन कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज़ एंड वर्कर्स (CCGEW) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को समय रहते नहीं माना गया, तो वे 12 फरवरी 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।
इस संबंध में CCGEW ने कैबिनेट सचिव को एक औपचारिक पत्र भेजा है। पत्र में संगठन ने 8वें वेतन आयोग से संबंधित मांगों के साथ-साथ कर्मचारियों और श्रमिकों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया है।
सभी संबद्ध संगठनों की भागीदारी
CCGEW के महासचिव एस.बी. यादव ने बताया कि संगठन से जुड़े सभी केंद्रीय कर्मचारी संघ इस प्रस्तावित हड़ताल में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों की अनदेखी के चलते लिया गया है और संगठन अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
8वें वेतन आयोग को लेकर प्रमुख मांगें
CCGEW की सबसे प्रमुख मांगों में से एक यह है कि 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को अंतिम रूप देते समय कर्मचारियों के सुझावों को शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन से जुड़े मुद्दों का न्यायसंगत समाधान निकल सकेगा।
इसके अलावा CCGEW ने मांग की है कि:
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1 जनवरी 2026 से 20% अंतरिम राहत (Interim Relief) दी जाए, ताकि तब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत मिल सके, जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं हो जातीं।
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संगठन का तर्क है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और आयोग की सिफारिशों में समय लगने के कारण कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर असर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था, और इसे 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं।
श्रम कानूनों और रोजगार सुरक्षा से जुड़ी मांगें
CCGEW ने वेतन आयोग के अलावा श्रम और रोजगार से जुड़े कई मुद्दों पर भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) को पूरी तरह रद्द किया जाए, क्योंकि संगठन का मानना है कि ये श्रमिक हितों के खिलाफ हैं।
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किसी भी रूप में कार्य का कैजुअलाइजेशन, ठेका प्रथा या आउटसोर्सिंग को बढ़ावा न दिया जाए।
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ठेका कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन और समान सुविधाएं दी जाएं।
पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
CCGEW ने पेंशनभोगियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों को भी प्रमुखता से उठाया है। संगठन की मांग है कि:
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सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम पेंशन ₹9,000 प्रति माह सुनिश्चित की जाए।
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असंगठित, कृषि और अस्थायी श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जाए।
बोनस से जुड़ी मांगें
इसके अलावा संगठन ने सरकार से यह भी मांग की है कि:
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बोनस की राशि, उसकी पात्रता और भुगतान पर लगी सभी सीमाएं समाप्त की जाएं, ताकि कर्मचारियों को उनका पूरा लाभ मिल सके।
आंदोलन की चेतावनी
CCGEW ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो कर्मचारी संगठन मजबूर होकर आंदोलन तेज करेंगे। 12 फरवरी 2026 की प्रस्तावित हड़ताल इसी आंदोलन का पहला बड़ा चरण मानी जा रही है।
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