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8th Central Pay Commission ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट (8cpc.gov.in) शुरू कर दी है और MyGov पोर्टल पर 18 सवालों का एक सार्वजनिक सर्वे जारी किया है। इन सवालों के जवाब देने की अंतिम तारीख 16 मार्च 2026 है।
पहली नज़र में यह एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन अगर इन सवालों को ध्यान से पढ़ा जाए तो पता चलता है कि आयोग कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सचमुच राय बनाना चाहता है। अभी कुछ भी तय नहीं है — अंतिम फैसला देश की आर्थिक स्थिति, सरकारी खर्च की क्षमता और उस समय के नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगा। लेकिन सवालों की भाषा यह जरूर बताती है कि आयोग किन विषयों पर गंभीरता से सोच रहा है।
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
1. वेतन बढ़ाने का आधार क्या हो? (प्रश्न 1–5)
आयोग सबसे पहले यह जानना चाहता है कि वेतन संशोधन की सोच क्या होनी चाहिए।
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क्या सरकार को खर्च संभालते हुए सीमित बढ़ोतरी करनी चाहिए?
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या कर्मचारियों को वास्तविक वेतन वृद्धि (महंगाई से ऊपर) मिलनी चाहिए?
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क्या सरकारी वेतन की तुलना निजी क्षेत्र से की जानी चाहिए?
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सरकारी नौकरी में मिलने वाली सुविधाएँ — जैसे घर, मेडिकल, नौकरी की सुरक्षा — क्या वेतन का हिस्सा मानी जाएँ?
एक सवाल यह भी है कि सरकारी नौकरी का शुरुआती वेतन बाहर की नौकरी, खासकर असंगठित और गिग कामगारों पर क्या असर डालता है। यानी आयोग सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं सोच रहा, बल्कि बड़े श्रम बाजार को भी देख रहा है।
2. असली मुद्दा: वेतन कितना और कैसे बढ़े? (प्रश्न 6–9)
यह वह हिस्सा है जिसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी होगी।
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फिटमेंट फैक्टर क्या सिर्फ महंगाई की भरपाई के लिए हो या उसमें असली वेतन वृद्धि भी शामिल हो?
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क्या ऊँचे पदों पर प्रदर्शन के आधार पर अलग वेतन या बोनस हो सकता है?
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क्या ग्रुप ‘A’ अधिकारियों का वेतन इतना आकर्षक है कि अच्छे लोग सरकारी सेवा में आएँ?
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क्या हर साल मिलने वाली 3% वेतन वृद्धि की दर बदलनी चाहिए?
इन सवालों से लगता है कि आयोग सिर्फ सामान्य बढ़ोतरी नहीं, बल्कि ढांचे में बदलाव पर भी विचार कर सकता है।
3. भत्तों में बदलाव संभव? (प्रश्न 10)
आयोग पूछ रहा है कि क्या पारंपरिक भत्तों (जैसे HRA, LTC आदि) की जगह “कैफेटेरिया मॉडल” लाया जाए। इसमें कर्मचारी को एक तय राशि मिले और वह अपनी जरूरत के हिसाब से भत्ते चुने।
यह सुविधा भी हो सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कुल बजट कितना दिया जाता है और विकल्प क्या होते हैं।
4. पेंशन का क्या होगा? (प्रश्न 11)
करीब 65 लाख पेंशनभोगियों को ध्यान में रखते हुए आयोग पूछ रहा है कि सीमित सरकारी संसाधनों के भीतर पेंशनरों की उचित उम्मीदें कैसे पूरी की जाएँ।
क्या पेंशन में भी वही फिटमेंट फैक्टर लागू हो?
क्या पुराने और नए पेंशनरों में बराबरी हो?
यह एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है।
5. महंगाई भत्ता (DA) बदल सकता है? (प्रश्न 12)
अभी DA सिर्फ महंगाई के आधार पर बढ़ता है। आयोग यह सोच रहा है कि क्या ऐसा मॉडल हो जिसमें महंगाई के साथ-साथ देश में वेतन वृद्धि को भी जोड़ा जाए। इससे हर 10 साल में बहुत बड़ा झटका देने की जरूरत कम हो सकती है।
6. अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग सोच? (प्रश्न 13–16)
रेलवे, रक्षा, CAPF, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए अलग से सवाल पूछे गए हैं। इसका मतलब है कि आयोग एक समान वेतन ढांचे के बजाय जरूरत के अनुसार अलग व्यवस्था पर विचार कर सकता है।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ती पेंशन और जनशक्ति लागत पर भी चिंता जताई गई है।
7. भविष्य की सरकारी नौकरी कैसी हो? (प्रश्न 17–18)
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क्या बोनस प्रणाली को प्रदर्शन से जोड़ा जाए?
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क्या सरकारी सेवा में लैटरल एंट्री, पार्ट-टाइम काम या फ्लेक्सी-टाइम बढ़ाया जाए?
यह सवाल सिर्फ वेतन नहीं, बल्कि पूरी सरकारी नौकरी की प्रकृति से जुड़े हैं।
आपकी राय क्यों जरूरी है?
आयोग को नवंबर 2025 से 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। इसलिए अभी जो सुझाव मिलेंगे, वे शुरुआती सोच को प्रभावित कर सकते हैं।
जवाब केवल MyGov पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल या कागज पर भेजे गए सुझाव नहीं माने जाएंगे। अंतिम तारीख 16 मार्च 2026 है।
अगर आप कर्मचारी हैं, पेंशनभोगी हैं या किसी संगठन से जुड़े हैं — तो यह सही समय है अपनी बात साफ और समझदारी से रखने का।
सवालों को ध्यान से पढ़िए, सोच-समझकर जवाब दीजिए और समय रहते अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करिए। यही मौका है अपनी आवाज़ पहुँचाने का।
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