राष्ट्रीय परिषद (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमेटी, जो संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) के अंतर्गत कार्य करती है, ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सप्ताह-भर की बैठक शुरू की है। इसका उद्देश्य 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) को प्रस्तुत किए जाने वाले मांगों के एक साझा ज्ञापन (Common Memorandum) को अंतिम रूप देना है। यह ज्ञापन लगभग 1.2 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों का प्रतिनिधित्व करेगा।
यह पहल उस समय हुई है जब 8वें वेतन आयोग को जनपथ स्थित चंद्रलोक भवन में कार्यालय आवंटित किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि आयोग औपचारिक रूप से अपने कार्यात्मक चरण में प्रवेश कर चुका है। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि आयोग द्वारा औपचारिक परामर्श प्रक्रिया शुरू करने से पहले उनकी सभी प्रमुख मांगों को एकजुट और सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया जाए।
NC-JCM के स्टाफ साइड के भीतर कई फेडरेशनों ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि जिन महत्वपूर्ण मुद्दों को उन्होंने पहले उठाया था, वे 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक कार्य-परिधि (Terms of Reference - ToR) में शामिल नहीं किए गए। इसलिए यह ड्राफ्टिंग अभ्यास उन मांगों को विस्तार से और मजबूती के साथ दोबारा प्रस्तुत करने का प्रयास माना जा रहा है।
यूनियनें चाहती हैं कि फिटमेंट फैक्टर, पेंशन सुधार और वार्षिक वेतन वृद्धि जैसे मुद्दे आयोग के समक्ष प्रमुखता से रखे जाएँ, भले ही वे ToR में स्पष्ट रूप से उल्लेखित न हों।
फिटमेंट फैक्टर: बहु-स्तरीय प्रस्ताव पर विचार
फिटमेंट फैक्टर में संशोधन इस बैठक का प्रमुख मुद्दा है।
फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन्स (FNPO) ने एक समान गुणक (मल्टीप्लायर) के बजाय बहु-स्तरीय फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव “एकरॉयड फॉर्मूला” पर आधारित है, जो चार सदस्यीय परिवार की आवश्यक जरूरतों के आधार पर न्यूनतम जीवन-यापन वेतन की गणना करता है।
प्रस्तावित संरचना
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लेवल 1–5: 3.00
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लेवल 6–12: 3.05 से 3.10
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लेवल 13–15: 3.05 से 3.15
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लेवल 16–18: अधिकतम 3.25
इस स्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य निम्न स्तरों पर अधिक सुधार सुनिश्चित करना और उच्च स्तरों पर वेतन संकुचन (pay compression) को रोकना है। लेवल 1 एंट्री-लेवल ग्रुप ‘C’ पदों से संबंधित है, जबकि लेवल 18 कैबिनेट सचिव स्तर का पद है।
संभावित प्रभाव (प्रस्ताव के अनुसार)
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लेवल 1–5: ₹54,000 से ₹87,600
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लेवल 6–12: ₹1,08,000 से ₹2,44,300
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लेवल 13–15: ₹3,61,500 से ₹5,74,000
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लेवल 16–18: ₹6,57,300 से ₹8,12,500
ये आंकड़े फेडरेशनों के प्रस्ताव हैं, आयोग की आधिकारिक सिफारिशें नहीं।
वार्षिक वेतन वृद्धि बढ़ाने की मांग
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 3% वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है। फेडरेशनों ने इसे बढ़ाकर 7% करने की मांग की है, जबकि FNPO ने कम से कम 5% वृद्धि का सुझाव दिया है।
यूनियनों का तर्क है कि महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए कर्मचारियों की दीर्घकालिक आय वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए अधिक वार्षिक वृद्धि आवश्यक है।
परिवार की परिभाषा बढ़ाने का प्रस्ताव
एक अन्य महत्वपूर्ण मांग “परिवार इकाई” की परिभाषा को तीन सदस्यों से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक करने की है, ताकि आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जा सके।
यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो वेतन गणना के फार्मूले पर इसका प्रभाव पड़ सकता है और न्यूनतम मूल वेतन में वृद्धि संभव है।
भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभ
ज्ञापन में भत्तों और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से संबंधित कई प्रस्ताव शामिल हैं:
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फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA): गैर-CGHS क्षेत्रों में पेंशनरों के लिए ₹1,000 से बढ़ाकर ₹20,000 प्रतिमाह।
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लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC): नकद एन्कैशमेंट की अनुमति।
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अवकाश नकदीकरण: सेवानिवृत्ति पर अधिकतम सीमा 300 दिनों से बढ़ाकर 400 दिन।
ये मांगें स्वास्थ्य खर्च और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती हैं।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली: एक संवेदनशील मुद्दा
सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मांगों में से एक पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली है।
कई फेडरेशनों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को समाप्त कर पुनः निश्चित लाभ आधारित OPS लागू करने की मांग दोहराई है। यूनियनों का कहना है कि गारंटीड पेंशन व्यवस्था सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
हालांकि सरकार का मत है कि NPS मॉडल दीर्घकाल में वित्तीय रूप से अधिक टिकाऊ है।
आगे क्या?
सप्ताह-भर की यह बैठक एक संयुक्त और विस्तृत ज्ञापन के साथ समाप्त होने की संभावना है, जिसे औपचारिक रूप से 8वें वेतन आयोग को सौंपा जाएगा।
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन मांगों में से कितनी स्वीकार होंगी, लेकिन यह बैठक अगले दशक के लिए केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे, पेंशन व्यवस्था और भत्तों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल कर्मचारी संगठन 3.25 फिटमेंट फैक्टर, 7% वार्षिक वृद्धि और OPS की बहाली को आयोग की चर्चा के केंद्र में रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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